170 नामांकन वाले राजकीय प्राथमिक विद्यालय पुरुषोत्तमपुर (हिंदी) में जर्जर भवन और अधूरे शौचालय से बढ़ी परेशानी

छौड़ादानों। राजकीय प्राथमिक विद्यालय, पुरुषोत्तमपुर (हिंदी) में कुल 170 बच्चों का नामांकन है। विद्यालय में कक्षा 1 से 5 तक की पढ़ाई होती है। वर्तमान में 10 शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें प्रधानाध्यापिका रजनी कुमारी सहित 6 महिला और 4 पुरुष शिक्षक शामिल हैं। विद्यालय में खेती-बारी के मौसम के बावजूद 158 बच्चे उपस्थित मिले, जिसे […]
170 नामांकन वाले राजकीय प्राथमिक विद्यालय पुरुषोत्तमपुर (हिंदी) में जर्जर भवन और अधूरे शौचालय से बढ़ी परेशानी
पुरुषोत्तमपुर राजकीय प्राथमिक विद्यालय हिंदी

छौड़ादानों। राजकीय प्राथमिक विद्यालय, पुरुषोत्तमपुर (हिंदी) में कुल 170 बच्चों का नामांकन है। विद्यालय में कक्षा 1 से 5 तक की पढ़ाई होती है। वर्तमान में 10 शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें प्रधानाध्यापिका रजनी कुमारी सहित 6 महिला और 4 पुरुष शिक्षक शामिल हैं। विद्यालय में खेती-बारी के मौसम के बावजूद 158 बच्चे उपस्थित मिले, जिसे विद्यालय प्रबंधन ने संतोषजनक बताया।प्रधानाध्यापिका रजनी कुमारी ने बताया कि मध्याह्न भोजन सरकार के निर्धारित मेन्यू के अनुसार दिया जाता है। बच्चों को चावल, दाल, सब्जी के साथ निर्धारित दिनों में अंडा और फल भी उपलब्ध कराया जाता है। कक्षा 2 के छात्र आर्यन और कक्षा 1 के छात्र यश कुमार सहित बच्चों ने भी भोजन मिलने की पुष्टि की।विद्यालय में शिक्षक सुबोध कुमार सिंह, सुधीर कुमार, मो. जावेद आलम, रिजवान आलम, लवली कुमारी दास, दीपमाला कुमारी, शारदा देवी, राशदा खातून, शबरा खातून तथा एक तालिमी मरकज कार्यरत हैं।हालांकि विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की नियमित उपस्थिति संतोषजनक है, लेकिन बुनियादी सुविधाओं की कमी अब भी बनी हुई है। विद्यालय का एक पुराना कमरा पूरी तरह जर्जर हो चुका है, जिसकी छत क्षतिग्रस्त है और वह उपयोग के लायक नहीं रह गया है। वहीं एक नए कमरे का निर्माण स्वीकृत होने के बावजूद अब तक पूरा नहीं हो सका है।इसके अलावा करीब दो वर्षों से निर्मित शौचालय अधूरा पड़ा है, जिससे बच्चों और शिक्षकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालय कार्यालय और रसोईघर की छत भी बारिश के दौरान टपकती है। इससे कार्यालय का काम प्रभावित होता है और रसोईघर में भोजन बनाने में भी काफी दिक्कत होती है।प्रधानाध्यापिका रजनी कुमारी ने प्रशासन से जर्जर भवन के पुनर्निर्माण, स्वीकृत कमरे का शीघ्र निर्माण, अधूरे शौचालय को पूर्ण कराने तथा कार्यालय और रसोईघर की मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि बच्चों को बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।