सहयोग शिविर के बीच गम्हरिया कला विद्यालय की बदहाली भी आई सामने, जिला कल्याण पदाधिकारी ने अधिकारियों की उपस्थिति पर जताई नाराजगी

आदापुर। प्रखंड की गम्हरिया कला पंचायत में आयोजित सहयोग शिविर में विभिन्न विभागों ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और योजनाओं से संबंधित आवेदन प्राप्त किए। वहीं दूसरी ओर पंचायत के राजकीय प्राथमिक विद्यालय की व्यवस्था पर भी छात्रों और ग्रामीणों ने कई सवाल उठाए।स्वास्थ्य विभाग के विजन सेंटर द्वारा 80 लोगों की आंखों की जांच की गई। जांच में मोतियाबिंद एवं अन्य नेत्र रोग से पीड़ित लोगों को चिह्नित किया गया। पात्र लाभार्थियों को लगभग एक माह बाद निःशुल्क चश्मा उपलब्ध कराया जाएगा। सामान्य स्वास्थ्य शिविर में शाम तक 160 मरीजों का इलाज किया गया तथा देर शाम तक उपचार जारी रहा।पीएचईडी विभाग के पास वार्ड संख्या 4, 5, 11 और 13 से नल-जल योजना की मरम्मत एवं संचालन के लिए आवेदन प्राप्त हुए। ग्रामीणों ने पाइप लाइन टूटने, जलमीनार क्षतिग्रस्त होने तथा कई स्थानों पर योजना बंद रहने की शिकायत दर्ज कराई। विद्युत विभाग को बिजली का खंभा लगाने एवं बिजली बिल सुधार से संबंधित चार आवेदन मिले। जीविका विभाग को ₹10 हजार की सहायता राशि नहीं मिलने से संबंधित एक आवेदन प्राप्त हुआ। खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को राशन कार्ड से जुड़े पांच आवेदन मिले। सामाजिक सुरक्षा विभाग को वृद्धावस्था, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन से संबंधित 34 आवेदन तथा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को 13 आवेदन प्राप्त हुए।दोपहर करीब 3:30 बजे जिला कल्याण पदाधिकारी संतोष कुमार पांडे सहयोग शिविर पहुंचे। उनके पहुंचने तक कुछ विभागीय अधिकारी शिविर से जा चुके थे, जबकि कुछ अधिकारी वापस लौटने की तैयारी में थे। स्थिति देखकर उन्होंने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को दोबारा बुलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि शाम को सभी विभागों की उपस्थिति एवं कार्यों की समीक्षा कर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी तथा जो भी अधिकारी या कर्मी बिना अनुमति अनुपस्थित या समय से पहले शिविर छोड़कर गए पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।इसी दौरान राजकीय प्राथमिक विद्यालय की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में रही। निरीक्षण के दौरान रसोइया मिट्टी से बर्तन साफ करती मिली। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि विद्यालय में नियमित विषयवार पढ़ाई नहीं होती, सभी शिक्षक पूरे समय कक्षा नहीं लेते तथा मध्याह्न भोजन के बाद अधिकांश बच्चे खेलकूद कर घर लौट जाते हैं। विद्यालय के बाहर कीचड़ और जलजमाव के कारण बच्चों को आने-जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने टोला सेवक की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।सहयोग शिविर में उठे जनहित के मुद्दों और विद्यालय की बदहाल व्यवस्था ने पंचायत में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा शिक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।